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Wednesday, November 22, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 36 (Photography : Bird 36 )

Photography: (dated 06  07 2016 11:30 AM )

Place : Zirakpur(chhatbir Zoo), Punjab, India

Great white pelican

The great white pelican also known as the eastern white pelican, rosy pelican or white pelican is a bird in the pelican family. It breeds from southeastern Europe through Asia and Africa, in swamps and shallow lakes.The great white pelican is a huge bird—only the Dalmatian pelican is averagely larger among pelicans.

Scientific name:  Pelecanus onocrotalus

Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

देवहंस को पूर्वी श्वेत देवहंस, गुलाबी देवहंस या श्वेत देवहंस के रूप में भी जाना जाता है, यह पेलिकन परिवार का एक पक्षी है। यह दक्षिणी यूरोप से एशिया और अफ्रीका के माध्यम में दलदलों और उथले झीलों में पाया जाता है। यह एक विशाल पक्षी है - केवल हौसिल बत्तख ही बत्तख पक्षी में या देवहंस से बड़ा है। 

वैज्ञानिक नाम: पेलेकन ओकोक्रोटुलस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-
हिन्दी:देवहंस, Gujarati: ગુલાબી પેણ; Malayalam: വെൺ കൊതുമ്പന്നം; Nepali: ठूलो घाउँके हावासील; Oriya: ରାଜ ହଂସ




-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Monday, November 20, 2017

मित्र मंडली -44



मित्रों ,
"मित्र मंडली" का चौवालिसवां अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 13.11.2017  से 19.11.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-

HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML
मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -44     

 इस सप्ताह के नौ  रचनाकार 

तुम कवि हो...पर मै.......!

अनु अन्न लागुरी  जी 

"कहते हैं ''जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि'' परन्तु जब कोई किसी  वेदना और हर्ष को जीता है तो क्या कवि उस पीड़ा या सुख को कलमबंद कर सकता है कर भी लिया तो क्या उसकी रचना, पीड़ा या सुख भोगने वालों की बराबरी कर पाएगा, शायद नहीं। भोगने और कल्पना करने में आसमां और जमीं का अंतर है।  सुन्दर कविता एवं प्रस्तुति "

रूठे हैं अपने ही.....

दो दिन का इश्क़ 

श्वेता सिन्हा जी 

शहद है तू !

मीना शर्मा जी 

दोहे "नारी बहुत अनूप"

राधा तिवारी  जी  

ये कहानी भी सुनानी, है अभी तक गाँव में ...

दिगम्बर नसवा  जी 

"गाँव के साथ जुड़ी उसकी यादों को बखूबी पेश किया है इस सुन्दर ग़ज़ल में , मन केवल वाह !वाह !वाह ! कहना चाहता है ।  

माँ, बेटा और प्रश्न

पुरषोत्तम कुमार सिन्हा जी 

''अवशेष''

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 27-11-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी दो प्रस्तुति  : 

1. शरद पूर्णिमा





2. हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य (भाग-1)










Friday, November 17, 2017

हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य (भाग-1)

हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य (भाग-1)

मुख्य पर्यटन स्थल  के भ्रमण हेतु जब कोई पर्यटक कार्यक्रम बनाता है तो उसकी कोशिश रहती है कि आस-पास के क्षेत्रों का भी अवलोकन कर लिया जाए, परन्तु कभी-कभी मुख्य क्षेत्र के अवलोकन के साथ अन्य क्षेत्र के अवलोकन  करने का मौसम नहीं भी रहता है फिर भी उसके मन में होता है कि जब यहाँ तक आ ही गए है तो वहाँ एक बार जा कर देखने में हर्ज क्या है ? और जब वहाँ जाता है तो कुछ खास नहीं देख पाने का अफ़सोस के साथ दुबारा उस स्थल पर आने का अपने आप को वचन देता है जो संभवतः उस स्थल पर आना कभी संभव नहीं हो पाता है।

ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ परन्तु जिस स्थल को हम देखने गए उसका मौसम नहीं था परन्तु संतोष की बात यह थी कि यह स्थल मेरे निवास स्थान से मात्र 32  कि.मी. की दूरी पर है इस लिए इस पोस्ट का शीर्षक भाग- 1 के नाम से इस उम्मीद से प्रकाशित कर रहा हूँ कि उपयुक्त मौसम में यहाँ आ कर आपके लिए  इस शीर्षक का भाग- 2 भविष्य में प्रस्तुत करूँगा।

मैं 5 अक्टूबर 2017 राजपत्रित अवकाश एवं शरद ऋतू के प्रारंभ होने के कारण मैंने "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" जाने का निश्चय किया और निकल पड़े सुबह नास्ता करके हरिके पत्तन के लिए। मैं यहाँ एक बात का ज़िक्र करना चाहूँगा कि वेटलैंड या वन्यजीव अभ्यारण्य के बारे में स्थानीय लोगों को बहुत ही कम जानकारी होती है। इसलिए गूगल बाबा की सहायता ली और पता चला कि यहाँ घूमने का उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है।

तो आइए ! आप को ले चलते है "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" जो पंजाब के फिरोजपुर ज़िले के अधीन है। यह स्थल जालंधर से 43.5  कि.मी., अमृतसर से 84  कि.मी. एवं फ़िरोज़पुर से 84 कि.मी.की दूरी पर स्थित है। सबसे नज़दीक रेलवे स्टेशन  मक्खू है। मक्खू रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से यह स्थल 10 कि.मी. उत्तर में स्थित है।  

8600 हेक्टेयर के विस्तारित क्षेत्र में फैले इस हरिके वेटलैंड को पक्षी अभयारण्य 1982 ई. में घोषित किया गया। यहाँ सर्दी के मौसम में पक्षियों की 200 प्रजातियां पायी जाती हैं। 

जब मैं जब हरिके पत्तन पहुँचा तो मेरा स्वागत सतलुज नदी के ऊपर बने पुल, हरिके बाँध  एवं इंदिरा गांधी नहर ने किया। मैं वहाँ के दृश्य को अपलक देख रहा था। इंदिरा गांधी नहर दक्षिण-पश्चिम में लगभग 640 किमी लंबी है।  राजस्थान के चुरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाडमेर और नागौर जैसे रेगिस्तानी जिलों के निवासियों को इस परियोजना से पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। प्रकृति एवं मानव निर्मित चमत्कार को एक साथ देख मैं मुग्ध हो रहा था। व्यास नदी यहाँ आकर सतलुज नदी में मिल जाती है। मुझे ये तो पता था कि "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" यहीं कहीं आस-पास होना चाहिए था। अतः मैं बराज को पार कर सामने गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर, हरिके में प्रवेश किया। वहाँ का परिदृश्य विहंगम एवं मनोरम था। वहाँ के स्थानीय लोगों को भी पक्षी अभयारण्य के बारे में पता नहीं था तो मैंने गुरुद्वारा के जत्थेदार जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि पुल पार कर लगभग एक किलोमीटर की दुरी पर है।  हमलोग वहाँ पहुँचे तो वह वन विभाग का दफ्तर था। वहाँ "पक्षी अभयारण्य" के लिए परमिट मिलता है। वहाँ पता चला कि "गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर" के साथ वाला रास्ता ही "पक्षी अभयारण्य" को जाता है और अभी वहाँ पक्षी देखने को नहीं मिलेगा। अथार्त गूगल बाबा ने यहाँ धोखा दे दिया। उपयुक्त समय मध्य नवम्बर से फरवरी हैं।

हमलोग परमिट लेकर "पक्षी अभयारण्य" का भ्रमण किया। जो दिखा उसकी कुछ तस्वीरें आप भी देखें। 


हरिके बाँध 

 इंदिरा गांधी नहर



गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर


गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर का परिदृश्य 

गुरुद्वारा ईशरधाम, नानकसर का हॉल का प्रवेश द्वार  

पक्षी अभयारण्य के पास धान काट कर दाने को ट्रैक्टर में भरता मशीन  
पक्षी अभयारण्य की पगडंडियां 



पक्षी अभयारण्य में उड़ाते तोतों का झुण्ड 
पक्षी अभयारण्य का व्यू पॉइंट 


पक्षी अभयारण्य में शाह बाज़

पक्षी अभयारण्य में बन्दर महोदय 

पक्षी अभयारण्य में पानी के शैवाल निकालने की मशीन  






-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Wednesday, November 15, 2017

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा 

देखूँ चमकते चाँद-तारों को,
तेरे ही आँचल के साये में,
इस तरह जब भी मैं तुझे देखूँ,
शर्म से छुपता, चाँद बादल में।

शरद की ठंडी हवा का झोंका,
और तेरा उड़ता हुआ आँचल,
तुम्हें देख कर याद आता है,
आवारा बादल व चाँद चंचल।

तेरी ख़ामोशी को क्या समझूँ ?
खामोशी में सुंदर दिखती हो,
थोड़ी देर मुखर हो जाओ तुम,
कि मेरी अभिलाषा साकार हो।

तुम सिमटी आई हो, बाहों में,
दिल पर रहा नहीं मेरा काबू,
खुला आसमां, चाँद और तारे,
और मैं हो रहा था बेकाबू।

तुम थी, था बेकाबू मन मेरा,
थी साँसें,सुलगता जिस्म तेरा,
शरीर से आत्मा तक पहुँचा,
एक लंबा गहरा चुम्बन तेरा। 

इन्हीं सब यादों को सीने में,
यूँ ही संजोया मैंने अबतक,
इसी के सहारे जिंदा हूँ मैं,
देखें! ये साँस चलेगी कबतक। 
  
-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Monday, November 13, 2017

मित्र मंडली -43



मित्रों ,
"मित्र मंडली" का तैतालीसवां अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 06.11.2017  से 12.11.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-

HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML
मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -43     

आज तो पौ बारह हो गया, इस सप्ताह के बारह रचनाकार 

नग़मों का आना जाना है !

मीना शर्मा जी 

ज़िंदगी के गीत खुल के गाइए ...

दिगम्बर नसवा  जी 

अब नहीं लौटेगा आहत मन..


उपासना स्याग जी  

रूबरू

पुरषोत्तम कुमार सिन्हा जी 

"मां मैं तेरा बछड़ा हूँ"

राधा तिवारी  जी  

अष्टावक्र गीता - भाव पद्यानुवाद (पेंतालीसवीं कड़ी)

कैलाश शर्मा जी 

आरक्षण और बेरोजगारी.........

सुधा देवरानी जी  

"आज की ज्वलंत समस्या पर लिखी एक सुन्दर भावपूर्ण कविता। "

हर लम्हां गुजरता है

लोकेश नशीने जी 

जीवन की विडम्बनाएँ

अनन्या

विश्व मोहन जी

कविताएँ रची जाती..... 

श्वेता सिन्हा जी 

समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 20-11-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी दो प्रस्तुति  : 

1. फोटोग्राफी : पक्षी 34 (Photography : Bird 34 )








2. फोटोग्राफी : पक्षी 35 (Photography : Bird 35 )