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Friday, January 19, 2018

तुम्हारा साथ


 

तुम्हारा साथ - 2

न मोहताज़ हो तुम किसी के,
न मोहताज़ हम हैं किसी के,
पर खाई थी हमने कसमें,
ये जीवन साथ बिताने का। 

जीने के तमाम साधन हैं,
तेरे यहाँ भी कमी नहीं है,
क्या ये ख़्वाहिश थी हमारी
बेदर्द दस्तूर जीने का। 

सर्द कोहरे में थे हम गुम,
एक गर्म शॉल में थे हम-तुम,
क्या तुम्हें याद नहीं आता,
गुजरा हुआ वो पल प्यार का। 

सर्द मौसम और नर्म-धूप,
हाथों में हाथ और हम-तुम,
क्या तुम्हें याद है एक कप,   
औ' एक-एक घूँट वो चाय का। 

आओ फिर से कोशिश करें,
यूँ ना हम घुट-घुट कर मरें,
एक दूजे के लिए ही जिए हम,  
सहारा बनें एक दूजे का।    

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"
Hindi Poetry: मेरी स्वरचित कविता "तुम्हारा साथ - 2" का पाठ सुने :





Wednesday, January 17, 2018

फोटोग्राफी : पक्षी 44 (Photography : Bird 44)


Photography: (dated 27  11 2017 07:50 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Male Mallard

Malard is a big and heavy body duck. It has a long body and has a long beak. Male Malard neck and head is a dark green and yellow beak. There is a purple-brown on the floor and brown color on the body.

Scientific name:  Anas platyrhynchos

Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

मालार्ड एक बड़ा और भारी शरीर वाला बतख है। इसको एक लंबा शरीर है और एक लंबा-चौड़ा चोंच होता है।  पुरुष मालार्ड के गर्दन एवं सिर गहरे हरे रंग और पीले रंग का चोंच होता है।स्तन पर बैंगनी-भूरा और शरीर पर भूरा रंग होता है।


वैज्ञानिक नाम: अनास प्लैटहिन्चोस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-


Assamese:আমৰ’লীয়া হাঁহ; Bengali: নীলশির, নীলমাথা হাঁস; French: Canard colvert; Gujarati: નીલશિર; Hindi: नीलसीर बत्तख, नीरागी, हिरागी; Marathi: चतुरंग बदक; Nepali: हरियो टाउके; Sanskrit: नीलग्रीव हंसक, ढामरा; Spanish: ánade real,azulón; Tamil: காட்டு வாத்து













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-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Monday, January 15, 2018

मित्र मंडली -52


शुभ मकर संक्रांति  (2018) की हार्दिक शुभकामनाएँ 
मित्रों , 
"मित्र मंडली" का बावन वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 08.01.2018  से 14.01.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -52  

इस सप्ताह के सात रचनाकार 

तल्खियाँ

मीना शर्मा जी 

तेरे नेह में

"वो" (2)

मीना भारद्वाज  जी 

"छोटे से किरदार को सशक्त एवं नया आयाम देती कहानी। सुन्दर उद्देश्यपूर्ण प्रस्तुति। "

रवींद्र सिंह यादव जी 

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 22-01-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....
मेरी दो प्रस्तुति  : 



http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2018/01/blog-post.html


Friday, January 12, 2018

"माँ-पिता का साया"










"माँ-पिता का साया"

उनके पास है अनुपम उपहार,
जिनके पास माँ-पिता होते हैं,
इनका साया जिनके सर पर हो.
वे ही चैन की नींद सोते हैं। 

चिंता नहीं होती थी कभी भी,
कभी ना कोई कमी रहती थी,  
जाने कैसे, माँ की हाथों में,   
सदा पोटली जादू की रहती थी। 

जब भी हम परेशान होते हैं,
माँ को दुखड़ा कह, सो जाते हैं, 
माँ की ममता के आगे ही तो,
सदा सभी बच्चे ही रहते हैं। 

पिता का प्यार, बरगद की छाँव,  
उनकी शिक्षा है, जीवन की नाव,
आज जीवन खुशहाल है अपना,
उनके ही दम से खड़े है पाँव। 

पिता, आदर्श जीवन जीते हैं,
बच्चों के प्रेरणा स्रोत होते हैं,  
कितने भी हो वे परेशान, पर,  
घर की मांगों को पूरा करते हैं।   

जीवन भर उनकी सेवा करना,
संतान के सभी धर्म निभाना,
कर्ज ना कोई इनका उतार सका,
सदा ही इनके काम तुम आना। 

इनके चरणों में स्वर्ग होता है,
देव-तुल्य हैं, ये शास्त्र कहता है,
सेवा करें हमसब माता-पिता की,
यह मौका सभी को कहाँ मिलता है। 

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, January 10, 2018

फोटोग्राफी : पक्षी 43 (Photography : Bird 43 )


Top post on IndiBlogger, the biggest community of Indian Bloggers

Photography: (dated 27  11 2017 07:50 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Domestic goose

Domestic goose was preserved by humans as a poultry for its meat, eggs and down feathers in ancient times.

Scientific name:  Ansar Acer Domestics or Ansar Sogoids Domestics

Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

घरेलू हंस को  प्राचीन समय में अपने मांस, अंडे और डाउन फेदर के लिए पोल्ट्री के रूप में मनुष्यों द्वारा पालतू बना कर रखे जाते थे।


वैज्ञानिक नाम: अन्सर एसर डोमेस्टिक्स या अंसार साइोगोइड्स डोमेस्टिक्स
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-
हिन्दी:हंस;Nepali:घरपालुवा पानीहाँस; Punjabi:ਹੰਸ; Tamil: வாத்து; Malayalam: വാത്ത്; Marathi:हंस; Tamil:வாத்து; Telugu:గూస్; Urdu:ہنس ;Bengali:হংসী













-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Monday, January 8, 2018

मित्र मंडली -51



नव-वर्ष (2018) की हार्दिक शुभकामनाएँ 
मित्रों , 
"मित्र मंडली" का इक्यावन वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 01.01.2018  से 07.01.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"
मित्र मंडली -51 

इस सप्ताह के सात रचनाकार 


कविता  रावत जी 

आनन्द प्रेम का...

यशोदा अग्रवाल 

"प्रेम अपरिभाषित है परन्तु शाश्वत भी है। इसके बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती। इसी कथनी को पुनः स्थापित करती सुन्दर कविता।  "  

कविता वह मकरंद है.....

मीना शर्मा जी 

दिगम्बर नसवा  जी 

सुशील कुमार जोशी  जी 

विप्रलब्धा

पुरषोत्तम कुमार सिन्हा जी 


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 15-01-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....
मेरी दो प्रस्तुति  : 






http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2018/01/blog-post.html



Friday, January 5, 2018

सामाजिक पशु,



सामाजिक पशु, (एक मुक्त कविता)

काम और युद्ध प्रवृत्ति में बंधा मैं,
हमेशा हिंसा करने को आतुर,
काम-वासना में लिप्त,
पशु जैसा ही तो हूँ मैं,
अंतर है तो बस सामाजिक होने का। 

पशु, जब जो चाहा,
उसे देता है अंजाम,
करता है हमला और हत्या,
विचार आते हैं मुझे भी,
चाहता हूँ पशु की तरह,
परन्तु अंजाम पूर्व सोचता हूँ,
बनाता हूँ सहमति,
अंतर है तो बस सामाजिक होने का। 

अगर नहीं बनती है सहमति,
तो चढ़ा लेता हूँ,
चेहरे पर नक़ाब,
करता हूँ स्वयं से युद्ध,
नहीं हावी होने देता पशुता को,
चंद दे देते हैं अंजाम,
जब जो चाहा,
चाहे हो मतभेद,
बने रहते हैं पशु,
उनमें और मुझमें,
अंतर है तो बस सामाजिक होने का। 

करते हैं जो अनैतिक कार्य,
काम-वासना और उत्तेजना में,
और पाए जाते हैं लिप्त, 
किसी वारदात में,
किस में नहीं है,
काम-वासना और उत्तेजना,
परन्तु अंजाम पूर्व,
मैं सोचता हूँ,
क्योंकि मैं हूँ,
सामाजिक पशु,
अवसाद, परिवेश और संगती,
नहीं बनने देते सामाजिक पशु, 
अपराधी और मुझ में 
अंतर है तो बस सामाजिक होने का।

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"