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Monday, July 17, 2017

मित्र मंडली - 26




मित्रों ,
"मित्र मंडली" का छब्बीसवां अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 11.07.2017  से 16.07.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-
HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML
मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली - 26 

इस सप्ताह के सात रचनाकार 




अर्धसत्य

मीना शर्मा जी 

सत्य-अर्धसत्य के बीच अंतर्द्वंद की स्थिति को कविता के माध्यम से सुन्दर ढंग से मीना जी ने प्रस्तुत की है, परन्तु मेरा मानना है कि जो सत्य है सुंदर है उसी में ईश्वर का वास है बाकी सब माया और वासना है।

अष्टावक्र गीता - भाव पद्यानुवाद (बयालीसवीं कड़ी)






आंख-मिचोली ... नींद और यादों की

नींद और यादों का चोली-दमन का साथ है। यादों के साये में कब नींद आ जाती है पता ही नहीं चलता और नींद के आगोश में आने के बाद जो स्वप्न चलता है उस पर भी यादों का साम्राज्य रहता है। अतः मानव समझ नहीं पाता कि जगा हुआ है या स्वप्न देख रहा है। दिगम्बर जी की अपनी शैली में रचित कविता बहुत ही सुंदर है।

मेहरानगढ़ जोधपुर - 3/3



मेहरानगढ़ जोधपुर  के बारे में विस्तृत जानकारी देती है और सुन्दर तस्वीरें  इस पोस्ट को आकर्षक बनाती है।

ख़ालीपन से दूर .....




यूँ मुसलसल ज़िन्दगी से

लोकेश जी की ग़ज़ल लाज़वाब है। एक से बढ़ कर एक शेर इस में समाहित है। अपनी मस्ती में रहने वाला व्यक्ति की अभिव्यक्ति है ये ग़ज़ल। इसको पढ़ कर आप भी अवश्य आनंद लें।

अहल्या अस्थान- अहियारी

सुदूर बिहार के सुन्दर स्थल कमतौल (दरभंगा ) के अहिल्या उद्धार के पवित्र स्थल के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ-साथ अपने विचार का समावेश इस पोस्ट में सुन्दर ढ़ंग से किया है। वैचारिक मतभेद के बावजूद आँचलिक प्यार का प्रभाव इनके रचना में स्पष्ट नज़र आती है। हिन्दुओं में वैचारिक मतभेद, शास्त्रों के प्रति कोई नई बात नहीं है परन्तु यह गर्व का विषय है अन्य धर्मों में इसकी कोई जगह ही नहीं है। यह एक शोधपूर्ण आलेख है।


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 24-07-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....


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